राजस्थान के सीकर जिले में स्थित खंडेला न केवल अपनी ऐतिहासिक विरासत के लिए जाना जाता है, बल्कि यहाँ की पहाड़ियों पर स्थित किले वाला बालाजी मंदिर भक्तों की गहरी आस्था का केंद्र है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!खंडेला के इतिहास और इस मंदिर के बारे में मुख्य जानकारी नीचे दी गई है:
किले वाला बालाजी मंदिर (पहाड़ी पर)
यह मंदिर खंडेला की ऊंची पहाड़ियों पर स्थित है और इसे स्थानीय रूप से “किले वाला बालाजी” के नाम से जाना जाता है।
- स्थान और स्वरूप: यह मंदिर पुराने किले के अवशेषों के पास पहाड़ी की चोटी पर बना है। यहाँ तक पहुँचने के लिए भक्तों को चढ़ाई करनी पड़ती है, जहाँ से पूरे खंडेला शहर का विहंगम दृश्य दिखाई देता है।
- धार्मिक महत्व: हनुमान जी (बालाजी) को समर्पित इस मंदिर के बारे में मान्यता है कि यहाँ मांगी गई मनोकामनाएं पूरी होती हैं। मंदिर में हनुमान जी की एक भव्य प्रतिमा है, जिसे बहुत चमत्कारी माना जाता है।
- सांस्कृतिक केंद्र: खंडेला में ‘खंडेला धाम’ भी प्रसिद्ध है, जहाँ हनुमान जी की विशाल प्रतिमा और खंडेलवाल समाज की कुलदेवियों के मंदिर हैं, लेकिन पहाड़ी वाला यह मंदिर अपनी प्राचीनता और शांत वातावरण के लिए विशेष है।

खंडेला का संक्षिप्त इतिहास
खंडेला एक अत्यंत प्राचीन नगर है, जिसका इतिहास 2000 साल से भी ज्यादा पुराना माना जाता है।
- प्राचीन नाम: इसे प्राचीन काल में ‘खंडिल्ल’ या ‘खंडेलपुर’ के नाम से जाना जाता था। यहाँ तीसरी शताब्दी ईसा पूर्व के शिलालेख भी मिले हैं।
- शासकों का इतिहास: * प्राचीन समय में यहाँ चौहान वंश के राजाओं का शासन था।
- 16वीं शताब्दी (लगभग 1538-1615 ई.) में राजा रायसल ‘दरबारी’ (शेखावत वंश) ने यहाँ अपना शासन स्थापित किया। वे अकबर के दरबार में महत्वपूर्ण मनसबदार थे।
- इतिहास में खंडेला दो हिस्सों में बंटा रहा, जिसे ‘बड़ा पाना’ और ‘छोटा पाना’ कहा जाता था। यहाँ दो अलग-अलग किले भी इसी विभाजन के प्रतीक हैं।
- धार्मिक संगम: खंडेला जैन और शैव मत का प्रमुख केंद्र रहा है। यहाँ लगभग 1000 साल पुराना प्रसिद्ध खंडलेश्वर महादेव का मंदिर है। साथ ही, यह खंडेलवाल वैश्य और जैन समाज का उद्गम स्थल भी माना जाता है।
- प्राकृतिक विशेषता: खंडेला पहाड़ियों से घिरा हुआ है और यहाँ से ‘कांती नदी’ का उद्गम क्षेत्र भी पास ही है, जो इस स्थान को ऐतिहासिक के साथ-साथ भौगोलिक रूप से भी महत्वपूर्ण बनाता है।
यदि आप वहां जाने की योजना बना रहे हैं, तो पहाड़ी की ऊंचाई से सूर्यास्त का नजारा और मंदिर की शांति एक अद्भुत अनुभव प्रदान करती है।
Editing By:- Suresh Jajam


"Suresh Kumar Saini is an experienced Tax Assistant and finance writer. He specializes in US & Canada Tax Guide, Indian Income Tax laws, GST compliance, and personal finance, helping freelancers and remote workers optimize their taxes."

















