लाल टेकड़ी आश्रम (साथीयावास, खंडेला) और संत शिरोमणि बाबा रघुनाथ दास जी महाराज का इतिहास श्रद्धा और तपस्या की एक अनूठी गाथा है। राजस्थान के सीकर जिले में स्थित यह स्थान क्षेत्र के प्रमुख धार्मिक केंद्रों में से एक माना जाता है।
Thank you for reading this post, don't forget to subscribe!यहाँ इस आश्रम और बाबा के इतिहास से जुड़ी मुख्य बातें दी गई हैं:
1. लाल टेकड़ी का नामकरण
इस स्थान को “लाल टेकड़ी” इसलिए कहा जाता है क्योंकि यहाँ की मिट्टी का रंग लाल है। लोक मान्यताओं के अनुसार, यहाँ के संतों की कठिन तपस्या के तेज से यह भूमि पवित्र और विशिष्ट हो गई।
2. बाबा रघुनाथ दास जी महाराज का आगमन
बाबा रघुनाथ दास जी महाराज एक उच्च कोटि के तपस्वी और सिद्ध संत थे। उन्होंने साथीयावास (खंडेला) के पास इस निर्जन और शांत स्थान को अपनी तपोस्थली के रूप में चुना।
- तपस्या: महाराज जी ने यहाँ वर्षों तक निराहार रहकर और धुणी (पवित्र अग्नि) तप कर आध्यात्मिक सिद्धियाँ प्राप्त कीं।
- चमत्कार और जनसेवा: क्षेत्र के लोगों में मान्यता है कि बाबा के आशीर्वाद से असाध्य रोग दूर हो जाते थे और सूखे की स्थिति में भी उनकी कृपा से राहत मिलती थी।
3. आश्रम का महत्व
लाल टेकड़ी आश्रम केवल एक मंदिर नहीं, बल्कि भक्ति का केंद्र है। यहाँ बाबा रघुनाथ दास जी की समाधि और उनकी प्रतिमा स्थापित है।
- धुणी साहिब: आश्रम में बाबा की वह पवित्र धुणी आज भी सुरक्षित है, जहाँ भक्त धोक लगाने और भभूत (राख) लेने आते हैं।
- गौ सेवा: आश्रम के इतिहास में गौ सेवा का विशेष स्थान रहा है। बाबा स्वयं गायों की सेवा को सर्वोपरि मानते थे।
4. धार्मिक आयोजन और मेला
हर वर्ष यहाँ बाबा की पुण्यतिथि या विशेष तिथियों (जैसे भाद्रपद मास) पर विशाल मेला भरता है। इसमें खंडेला, सीकर और आसपास के जिलों से हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं।

5. सामाजिक प्रभाव
बाबा रघुनाथ दास जी ने जाति-पाति के भेदभाव को मिटाकर मानवता और भक्ति का संदेश दिया। खंडेला के तत्कालीन राजघराने और सामंतों के बीच भी बाबा के प्रति अगाध श्रद्धा थी, जिसके कारण इस आश्रम के विकास में उनका भी सहयोग रहा।
संक्षेप में: लाल टेकड़ी आश्रम बाबा रघुनाथ दास जी की तपस्या का प्रतीक है, जो आज भी लोगों को मानसिक शांति और आध्यात्मिक ऊर्जा प्रदान कर रहा है।
















